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Sunday, 8 January 2012

सुना था...

सुना था कुछ तो होती है कशिश
सुना था कुछ होता है... खीचता है जो दिल को
ये जाना जब तुमने झुकी पलकों को उठा के देखा
ये माना जब खुद ही खीचने लगे उस झील की राहों में
दोस्त पूछ रहे हैं क्यों दीखते नहीं
रहते हो क्यो खोए खोए
क्या बताओं झील किनारे क्यो बैठा हूँ
कैसे कहूँ उस झील से क्या नाता है
तुमने पलकें उठायी मुस्कुरा के देखा और चल दी
पर हम आज भी झील किनारे बैठे हैं.....

Tuesday, 3 January 2012

आरंभ.. एक नयी शुरुवात

"ये इब्तेदा मेरी मंजिल के मुहाने से है,
फक्र अंजाम के सिरहाने मिलेगा......"
2012 एक नया साल जिसकी शुरुवात धमाकेदार खबर के साथ हुई, जिसका जिक्र कुछ दिन पहले की किसी ने मुझसे किया था... एक फोन कॉल से मेरी सोच को दिशा मिलते हुई नज़र आ रही है| नए साल की नई सुबह मैंने एक नया सपना देख लिया| जहां एक सफ़र का अंत होने को है.... मेरा और मेरे कॉलेज के तीन साल का सफ़र अब तीन महीनो में थमने वाला है.. वहीँ एक नयी ज़िन्दगी आरंभ होने वाली है...... नए लोग, इस नयी दुनिया कि भीड़ में कहीं मेरा भी नाम हो....   2011  ने काफी कुछ सिखा दिया है अब उसे आगे  ज़िन्दगी में आजमाना है... कुछ जिगरी दोस्त दिए जिनको साथ लेकर आगे बढ़ना है.... बहुत घूमना है, नए लोगो से मिलना है, और मुझे अपना सफ़र तह करना है.......
"अब किसी की बात का मुझे डर नहीं, मुश्किलों से ही तो है हिम्मत मेरी.... खेलनी है आखरी बाज़ी यहीं, और सफ़र ही बन गया मंजिल मेरी......."